अलखिया अखाड़ा: नागा संन्यासियों की रहस्यमयी और योद्धा परंपरा

Sanjay Bajpai
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अलखिया अखाड़ा: नागा संन्यासियों की रहस्यमयी परंपरा

🔱 अलखिया अखाड़ा: नागा संन्यासियों की रहस्यमयी परंपरा

अलखिया अखाड़ा भारत के प्राचीनतम धार्मिक सैन्य संगठनों में से एक है। यह जूना अखाड़ा की उप-इकाई है, जो दशनामी नागा संप्रदाय के अंतर्गत आता है — एक ऐसा संप्रदाय जिसे भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है।

🕉️ "अलख" का अर्थ

अलख शब्द का अर्थ है — "जो लक्षणों से परे हो" — अर्थात् निर्गुण ब्रह्म, सर्वोच्च चेतना। यही शब्द नागा संन्यासी भिक्षा मांगते समय उच्चारित करते हैं: अलख निरंजन!

⚔️ नागा: तपस्वी भी, योद्धा भी

  • संरचना: सैन्य रेजिमेंट जैसी
  • कार्य: विद्वान संतों की रक्षा
  • व्यवसाय: भाड़े के सैनिक, व्यापारी

🏛️ सामाजिक पृष्ठभूमि

अधिकांश नागा संन्यासी शूद्र वर्ग से आते थे और उन्होंने धर्म व सैन्य दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय भूमिका निभाई।

💰 व्यापारिक भूमिका

इन अखाड़ों ने धन उधार देना, व्यापार और संपत्ति प्रबंधन में भी भागीदारी की।

🕉️ कुंभ मेला में भूमिका

कुंभ मेले में स्नान का क्रम अखाड़ों की शक्ति और मान्यता को दर्शाता है। आज भी यह परंपरा जीवित है।

🔯 जूना और अलखिया

जूना अखाड़ा सबसे बड़ा नागा अखाड़ा है और अलखिया उसकी एक विशिष्ट तपस्वी शाखा है।


लेखक: संजय बाजपेयी | स्रोत: ऐतिहासिक और धार्मिक ग्रंथों का संकलन

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