अहिंसा: भारतीय परंपरा से वैश्विक चेतना तक
परिचय: अहिंसा क्या है?
"अहिंसा" संस्कृत का शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ है - "हिंसा का अभाव" या "किसी को नुकसान न पहुँचाना"। यह शब्द केवल शारीरिक हिंसा से परहेज तक सीमित नहीं है, बल्कि विचार, वाणी और कर्म तीनों स्तरों पर किसी को हानि न पहुँचाने की भावना का प्रतीक है। यह अवधारणा भारत की तीन मुख्य धार्मिक परंपराओं - हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म में सर्वोच्च नैतिक सिद्धांत के रूप में प्रतिष्ठित है।
योग और अहिंसा का संबंध
पतंजलि के योग सूत्रों में अहिंसा को पहले यम के रूप में वर्णित किया गया है। यदि व्यक्ति अहिंसा का पालन करता है तो अन्य यम (सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह) स्वतः पालन में आ जाते हैं। योग के अनुसार, अहिंसा केवल बाहरी व्यवहार नहीं, बल्कि आंतरिक मनोवृत्ति भी है — मन में भी किसी के प्रति द्वेष नहीं होना चाहिए।
बौद्ध धर्म और करुणा के साथ अहिंसा
बुद्ध का पहला उपदेश “अहिंसा परम धर्म” है। उन्होंने दुःख और उसकी उत्पत्ति के मूल कारणों को स्पष्ट किया, जिनमें हिंसा और द्वेष की भूमिका महत्वपूर्ण है। बौद्ध अनुशासन में पंचशील (पाँच नियम) हैं — जिनमें से पहला है "प्राणी हत्या से बचना"। करुणा और सह-अस्तित्व अहिंसा के ही विस्तार हैं।
जैन धर्म में अहिंसा की चरम सीमा
जैन धर्म में अहिंसा सर्वोपरि व्रत है। यह मात्र मानवों तक सीमित नहीं बल्कि सभी जीवों तक फैला हुआ है — सूक्ष्म जीवों तक भी। तपस्वी जैन साधु चलते समय झाड़ूमुँहपट्टी
अहिंसा का ऐतिहासिक उदाहरण: सम्राट अशोक
सम्राट अशोक (268–233 ई.पू.) पहले एक पराक्रमी विजेता थे जिन्होंने कलिंग युद्ध में भारी नरसंहार किया। लेकिन इस युद्ध के बाद उन्होंने बौद्ध धर्म को अपनाया और अहिंसा की नीति अपनाई। उनके शासनकाल में पशु वध, युद्ध, और हिंसक दंडों को हतोत्साहित किया गया। अशोक के शिलालेख आज भी उनकी अहिंसा-नीति के प्रमाण हैं।
महात्मा गांधी और आधुनिक राजनीतिक अहिंसा
महात्मा गांधी ने अहिंसा को सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक हथियार के रूप में भी प्रयोग किया। उन्होंने “सत्याग्रह” की अवधारणा विकसित की — जहाँ अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया जाता है, लेकिन बिना हिंसा के। गांधी के इस आंदोलन ने भारत को स्वतंत्रता दिलाई और वैश्विक स्तर पर नैतिक संघर्ष का नया मॉडल प्रस्तुत किया।
वैश्विक प्रभाव: मार्टिन लूथर किंग और अहिंसा
डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अमेरिका में नस्लीय भेदभाव के खिलाफ संघर्ष में गांधी के अहिंसात्मक सिद्धांतों को अपनाया। उन्होंने सिविल राइट्स मूवमेंट में गांधी के विचारों को आधार बनाकर एक क्रांतिकारी लेकिन शांतिपूर्ण आंदोलन खड़ा किया।
ईसाई धर्म और शांतिवादी परंपरा
यद्यपि गांधी उनके आदर्श थे, ईसाई धर्म में भी शांतिवादी परंपरा है। क्वेकर्स (Religious Society of Friends) जैसे समूह यीशु की अहिंसात्मक शिक्षाओं का पालन करते हैं। बाइबिल में भी “दूसरा गाल प्रस्तुत करना” जैसी शिक्षाएँ अहिंसा की ही प्रेरणा देती हैं।
अहिंसा और पर्यावरण जागरूकता
आधुनिक युग में अहिंसा की भावना पशु अधिकार आंदोलन और पर्यावरण संरक्षण के रूप में उभरी है। शाकाहार, प्लास्टिक का बहिष्कार, जैविक खेती — ये सभी जीवन के प्रति संवेदनशीलता और अहानिकरता की भावना का ही विस्तार हैं।
निष्कर्ष: क्या आज की दुनिया में संभव है अहिंसा?
हिंसा आज भी मानवता के समक्ष एक चुनौती है — चाहे वह युद्ध के रूप में हो, घरेलू हिंसा, पशु अत्याचार या पर्यावरण विनाश के रूप में। परंतु अहिंसा केवल एक नैतिक विकल्प नहीं, बल्कि सामूहिक अस्तित्व का आधार बन सकता है। जैसे गांधी ने कहा था — "अहिंसा कोई कायरों की ढाल नहीं, साहस का मार्ग है।"
