🕰️ रामायण की तिथि निर्धारण: दो मतवाद
1. पांडुलिपि-आधारित सिद्धांत
पांडुलिपियों की आयु के आधार पर विद्वानों ने रामायण की रचना का समय 1300 ई.पू. से 1800 ई. के बीच माना है। यह दृष्टिकोण रामायण को एक साहित्यिक और ऐतिहासिक विकासमान रचना मानता है, न कि शाश्वत महाकाव्य।
2. युग-आधारित सिद्धांत
यह सिद्धांत रामायण को त्रेता युग में स्थित मानता है। युगों की पारंपरिक गणना:
- कलियुग: 432,000 वर्ष
- द्वापर युग: 864,000 वर्ष
यदि कलियुग 3102 ई.पू. में प्रारंभ हुआ तो:
रामायण = 5000 + 864,000 = 869,000 वर्ष पूर्व
इस मत के अनुसार, रामायण लगभग 10 लाख वर्ष पहले घटित हुई थी।
🔬 वैज्ञानिक परीक्षण की आवश्यकता
जब तक इन मतों पर वैज्ञानिक परीक्षण और स्वतंत्र प्रमाण न हों, ये विश्वास आधारित विचार ही रहेंगे। प्रमाण-आधारित जाँच आवश्यक है।
🌄 डॉ. पी.वी. वार्तक का भूवैज्ञानिक अवलोकन
डॉ. वार्तक के अनुसार, रामायण लगभग 7300 ई.पू. में घटित हुई। उन्होंने पर्वतों की ऊँचाई के माध्यम से 10 लाख वर्ष के मत को चुनौती दी है।
हिमालय हर 100 वर्षों में 3 फीट ऊँचा होता है:
| पर्वत | वर्तमान ऊँचाई (फीट) |
|---|---|
| हिमालय | 29,029 |
| विंध्याचल | 5,000 |
अंतर = 24,029 फीट
समय = 24,029 ÷ (3 फीट/100 वर्ष) = लगभग 800,967 वर्ष
🌊 यमुना नदी का प्रमाण
Clift et al. के अध्ययन के अनुसार, यमुना का पूर्वमुखी प्रवाह 47,000 ई.पू. के बाद ही शुरू हुआ। चूंकि यह प्रवाह रामायण काल में मौजूद था, इसलिए रामायण 47,000 ई.पू. से पहले नहीं हो सकती।
🧭 अंतिम विचार
डॉ. वार्तक का मॉडल शोधकर्ताओं को आमंत्रित करता है कि वे परंपरा से आगे बढ़कर वैज्ञानिक विश्लेषण करें। यद्यपि प्राचीनता की संभावना है, लेकिन सभी दृष्टिकोणों की निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है।
