भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के अनुसार स्वास्थ्य केवल रोगों की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि शरीर, मन, इन्द्रियों और आत्मा की पूर्ण संतुलित स्थिति है। इसका सर्वोत्तम वर्णन सुश्रुत संहिता में मिलता है।
📜 मूल संस्कृत श्लोक (Sushruta Saṃhitā, Sūtrasthāna 15.38)
समा दोषाः समाग्निश्च सम धातु-मल क्रियाः।
प्रसन्नात्मेन्द्रिय-मनः स्वस्थ इत्यभिधीयते॥
— Suśruta Saṃhitā, Sūtrasthāna 15/38
IAST Transliteration:
Sama doṣāḥ samāgniś ca sama dhātu-mala-kriyāḥ ।
Prasannātmendriya-manaḥ svastha ity abhidhīyate ॥
🌿 “स्वस्थ” होने के सात आयुर्वेदिक मानदंड
| क्रम | सिद्धांत | अर्थ |
|---|---|---|
| 1️⃣ | Sama Dosha | वात, पित्त, कफ—तीनों दोषों का संतुलन |
| 2️⃣ | Sama Agni | पाचन एवं चयापचय अग्नि का संतुलित रहना |
| 3️⃣ | Sama Dhatu | शरीर के सभी धातुओं का ठीक प्रकार से पोषित होना |
| 4️⃣ | Sama Mala Kriya | मल, मूत्र, स्वेद का सही निष्कासन |
| 5️⃣ | Prasanna Indriya | इन्द्रियों का स्वस्थ और आनन्दित होना |
| 6️⃣ | Prasanna Manah | मन का प्रसन्न, शांत और स्थिर रहना |
| 7️⃣ | Prasanna Atma | आत्मा का संतोष और आध्यात्मिक संतुलन |
✨ आयुर्वेद का समग्र दृष्टिकोण
आयुर्वेद Body + Mind + Spirit तीनों के सामंजस्य को ही स्वास्थ्य मानता है।
“स्वस्थ” = स्व + स्थ = स्वयं में स्थित होना
अर्थात् — जो व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप में स्थित है, वही वास्तव में स्वस्थ है।
🩺 क्यों आधुनिक युग में यह परिभाषा अधिक महत्वपूर्ण?
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तनाव, चिंता और नींद की कमी
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असंतुलित खान-पान एवं जीवनशैली
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मोबाइल/स्क्रीन-टाइम बढ़ना
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रासायनिक दवाओं पर निर्भरता
इन सबके कारण मन और इन्द्रियों का असंतुलन बढ़ता जा रहा है।
आयुर्वेद हमें फिर से प्रकृति और आत्मा से जोड़ता है।
🧘 स्वास्थ्य के व्यावहारिक उपाय (Ayurveda Self-Care Tips)
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दिनचर्या (Daily Routine) का पालन
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मौसमानुसार आहार (ऋतुचर्या)
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ध्यान और योग
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संतुलित नींद
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दही, अचार, जंक-फूड सीमित
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ताज़ा, सात्त्विक भोजन
📚 Reference
Suśruta Saṃhitā, Sūtrasthāna 15/38 — Classical Ayurveda Text

