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July 01, 2025
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🔶 अकाल तख्त – शाश्वत की सीट
स्थान: अमृतसर, पंजाब के स्वर्ण मंदिर परिसर में स्थित है।
अर्थ: “अकाल तख्त” का अर्थ है “शाश्वत (अकाल) का सिंहासन (तख्त)”।
महत्व: सिख धार्मिक प्राधिकरण का सर्वोच्च केंद्र है।
सामुदायिक सभा: सिख समुदाय वर्ष में दो बार अकाल तख्त के सामने एकत्रित होता है।
निर्णय प्रक्रिया:
निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
एक बार निर्णय हो जाने के बाद उसे "गुरु का आदेश" माना जाता है।
यह आदेश सभी सिखों के लिए अनिवार्य माने जाते हैं।
ऐतिहासिक परंपरा:
10वें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1708 में घोषणा की थी कि अब कोई जीवित गुरु नहीं होगा।
सिखों को श्री गुरु ग्रंथ साहिब को ही अपना गुरु मानना चाहिए।
सिद्धांत: परंपरा और धार्मिक दिशा-निर्देश पूरे समुदाय द्वारा मिलकर तय किए जाते हैं — यह सामूहिक निर्णय प्रणाली है।
1. 🏛 इतिहास और स्थापना:
अकाल तख्त की स्थापना 1606 में गुरु हरगोबिंद साहिब ने की थी।
यह सिख धर्म का पहला और सबसे प्रमुख पंच तख्तों (पाँच धार्मिक सिंहासनों) में से एक है।
गुरु हरगोबिंद साहिब ने इसे धर्म और शक्ति (मीरी-पीरी) के प्रतीक रूप में स्थापित किया था।
2. ⚔️ मीरी और पीरी का सिद्धांत:
"मीरी" = सांसारिक शक्ति (political authority)
"पीरी" = आध्यात्मिक शक्ति (spiritual authority)
अकाल तख्त इन दोनों का संतुलन दर्शाता है – धर्म के साथ न्याय और नेतृत्व।
3. 🛡️ सिख विरोध और संघर्ष का प्रतीक:
अकाल तख्त हमेशा से सिख संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलनों का केंद्र रहा है।
1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान इस पवित्र स्थल को गंभीर क्षति पहुँची थी, जिसे बाद में फिर से बनाया गया।
4. 📜 वर्तमान भूमिका:
आज अकाल तख्त से ही सिख मर्यादा (code of conduct), घोषणाएँ, और धार्मिक निर्णय जारी किए जाते हैं।
यहाँ से जारी आदेशों को "हुकमनामा" कहा जाता है, जिन्हें सभी सिखों को मानना आवश्यक होता है।
5. 🌍 पंच तख्तों में अन्य तख्त:
1. अकाल तख्त साहिब (अमृतसर)
2. तख्त श्री केशगढ़ साहिब (आनंदपुर साहिब)
3. तख्त श्री दमदमा साहिब (तालवंडी साबो)
4. तख्त श्री पटना साहिब (पटना, बिहार)
5. तख्त श्री हज़ूर साहिब (नांदेड़, महाराष्ट्र)
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