सावन 2025: श्रावण मास का महत्व और व्रत

Sanjay Bajpai
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🌧️ सावन (श्रावण मास)

श्रावण मास हिंदू पंचांग का पाँचवाँ महीना है, जो विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है। यह महीना जुलाई से अगस्त के बीच आता है और इसे भक्ति, व्रत, और वर्षा ऋतु का प्रतीक माना जाता है।


🕉️ सावन क्यों खास है?
  • यह उस समय की याद दिलाता है जब भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान हलाहल विष पी लिया था, जिससे उन्हें नीलकंठ नाम मिला।
  • भक्त शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध और जल चढ़ाते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और स्वास्थ्य, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।

🚩 सांस्कृतिक मुख्य आकर्षण
  • वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में इस साल 1.5 करोड़ से ज़्यादा भक्तों के आने की उम्मीद है, जिसमें दर्शन, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए विस्तृत व्यवस्था की गई है।
  • शहर भगवा और भक्ति के सागर में बदल जाता है, हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठता है।

🌿 सावन में क्या करें?
  • श्रावण सोमवार को व्रत रखें
  • शिव पुराण का पाठ करें
  • ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें
  • बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें
  • मांस-मदिरा से दूरी रखें और सात्त्विक भोजन करें

🔱 श्रावण सोमवार व्रत का महत्व
  • कुंवारी लड़कियाँ अच्छा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं
  • विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं
  • भगवान शिव इस महीने शीघ्र प्रसन्न होते हैं

📅 2025 में सावन कब है?
  • सावन आरंभ: 10 जुलाई 2025 (गुरुवार)
  • सावन समाप्त: 8 अगस्त 2025 (शुक्रवार)
  • श्रावण सोमवार तिथियाँ:
    • 14 जुलाई 2025
    • 21 जुलाई 2025
    • 28 जुलाई 2025
    • 4 अगस्त 2025

🌸 सावन के प्रमुख त्योहार
  • हरियाली तीज
  • नाग पंचमी
  • रक्षा बंधन
  • झूला उत्सव (राधा-कृष्ण को झुलाना)

🕉️ सावन का धार्मिक महत्व
  • समुद्र मंथन की कथा में भगवान शिव ने हलाहल विष पिया और नीलकंठ कहलाए
  • सोमवार व्रत के साथ शिवभक्त विवाह, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं
  • बेलपत्र, गंगाजल, दूध, धतूरा से जलाभिषेक किया जाता है

🌿 सांस्कृतिक और पारंपरिक पहलू
  • हरियाली तीज, नाग पंचमी, रक्षाबंधन जैसे त्योहार इसी महीने में आते हैं
  • कांवड़ यात्रा में भक्त गंगाजल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं
  • महिलाएं सौभाग्य और सुखमय दांपत्य जीवन की कामना करती हैं

📜 पौराणिक उद्धरण:
“द्वादशस्वपि मासेषु श्रावणो मेऽतिवल्लभः।”
— भगवान शिव (स्कंद पुराण)
अर्थात्: "बारह महीनों में श्रावण मुझे अत्यंत प्रिय है।"

🔔 हर हर महादेव! सावन की पावन शुभकामनाएँ! 🔔

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