ॐ (प्रणव): ब्रह्मांडीय ध्वनि और चेतना की चार अवस्थाएँ

Sanjay Bajpai
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ॐ (प्रणव): ब्रह्मांडीय ध्वनि और चेतना की चार अवस्थाएँ

लेखक: |

, जिसे प्रणव भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र और रहस्यमयी ध्वनि मानी जाती है। यह केवल एक अक्षर नहीं, बल्कि एक दिव्य कंपन है जो संपूर्ण ब्रह्मांड और चेतना को समाहित करता है।

📚 ॐ की ध्वनि-संरचना: अ + उ + म = ॐ

संस्कृत वर्णमाला के प्रथम स्वर 'अ', मध्य स्वर 'उ' और अंतिम व्यंजन 'म' से मिलकर यह अक्षर बना है। यह सभी शब्दों और ध्वनियों का मूल स्रोत माना जाता है।

🧘 मांडूक्य उपनिषद और चेतना की चार अवस्थाएँ

प्राचीन ग्रंथ मांडूक्य उपनिषद के अनुसार ॐ चार चेतनात्मक अवस्थाओं का प्रतीक है:

  • अ (A) – जाग्रत अवस्था (Waking State)
  • उ (U) – स्वप्न अवस्था (Dream State)
  • म (M) – सुषुप्ति / गहन निद्रा (Deep Sleep)
  • ॐ / चतुर्थ – तुरीय अवस्था (Transcendental Consciousness)

🪔 धार्मिक और आध्यात्मिक उपयोग

ॐ का उच्चारण पूजा, ध्यान, योग, मंत्रोच्चारण

🌟 ॐ का लाभ

  • मन की शांति और स्थिरता प्राप्त होती है
  • नकारात्मक ऊर्जा का शुद्धिकरण
  • आध्यात्मिक ऊर्जा का जागरण
  • श्वास, मन और आत्मा का संतुलन

🔚 निष्कर्ष: ॐ – आत्मा से ब्रह्मा तक की यात्रा

ॐ केवल एक ध्वनि नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शक्तिब्रह्मांडीय चेतना

ॐ का प्रतीक
ॐ – ब्रह्मांड की आदि ध्वनि

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