हेलेना पेत्रोव्ना ब्लावात्स्की: थियोसोफिकल आंदोलन की रहस्यमय संस्थापक
एकाटेरिनोस्लाव (रूस) में हेलेना पेत्रोव्ना हैन-हैन के रूप में जन्मी, उन्होंने बचपन से ही गुप्त आध्यात्मिक शक्तियाँ विकसित कर ली थीं।
🧭 प्रारंभिक जीवन और विवाह
17 वर्ष की उम्र में उनका विवाह एक उच्च पदस्थ व्यक्ति से हुआ, परंतु वे जल्द ही उन्हें छोड़कर यूरोप, अमेरिका, मिस्र, भारत और तिब्बत की यात्रा पर निकल गईं। उन्होंने दावा किया कि इन यात्राओं के दौरान उन्हें वह गुरु मिले जिन्हें उन्होंने अपने बचपन के स्वप्नों में देखा था।
🌎 न्यूयॉर्क और थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना
1873 में वे न्यूयॉर्क में बस गईं और वहाँ आध्यात्मिक आंदोलन में सक्रिय हुईं। वहीं उनकी मुलाकात कर्नल हेनरी एस. ओल्कोट से हुई और दोनों ने मिलकर 1875 में थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना की।
📚 प्रमुख ग्रंथ और लेखन
- आइसिस अनवील्ड (Isis Unveiled) – 1877
- द सीक्रेट डॉक्ट्रिन (The Secret Doctrine) – 1888
इन ग्रंथों ने उन्हें विश्व स्तर पर एक गूढ़ ज्ञान और प्राचीन रहस्यों की व्याख्याता के रूप में स्थापित किया।
🇮🇳 भारत आगमन और 'द थियोसोफिस्ट'
वह 1878 में भारत आईं और थियोसोफिकल सोसाइटी का मुख्यालय अड्यार (मद्रास) में स्थापित किया। उन्होंने पूर्वी अध्यात्म और पश्चिमी विज्ञान को जोड़ने के उद्देश्य से एक पत्रिका 'द थियोसोफिस्ट' की भी स्थापना की।
🕊 'श्वेत कमल दिवस'
8 मई 1891 को उनकी मृत्यु हुई। इस दिन को थियोसोफिकल अनुयायी 'श्वेत कमल दिवस' (White Lotus Day) के रूप में मनाते हैं – जो शुद्धता, शांति और ज्ञान का प्रतीक है।
निष्कर्ष: हेलेना ब्लावात्स्की का जीवन रहस्य, ज्ञान और आध्यात्मिक खोज से भरा था। उन्होंने प्राचीन भारतीय तत्वज्ञान को पश्चिमी जगत में पहुँचाया और आध्यात्मिक पुनर्जागरण की एक नई लहर को जन्म दिया।