पतंजलि योग: राजयोग का दर्शन और अभ्यास
पतंजलि योग, जिसे राजयोग या ‘राजसी मार्ग’ भी कहा जाता है, योगसूत्रों पर आधारित है, जो महर्षि पतंजलि द्वारा रचित हैं। यह दर्शन सांख्य के शब्दों और दृष्टिकोण को अपनाते हुए आत्मा की मुक्ति की ओर विवेकशील ज्ञान के अभ्यास का मार्ग दिखाता है।
चित्त-वृत्ति-निरोध: योग की परिभाषा
योग का दूसरा सूत्र “चित्त-वृत्तिनिरोधः” योग को परिभाषित करता है: अर्थात् मन के उतार-चढ़ावों का शमन। चित्त की वृत्तियाँ ही बाह्य वस्तुओं और विचारों की ओर आकर्षण का कारण बनती हैं। जब ये वृत्तियाँ शांत हो जाती हैं, तो मन स्वतंत्र होता है।
क्लेश: जीवन में दुख का मूल
योगसूत्रों के अनुसार मनुष्य के दुखों के मूल पाँच क्लेश होते हैं:
- अविद्या (अज्ञान)
- अस्मिता (अहंकार)
- राग (आकर्षण)
- द्वेष (घृणा)
- अभिनिवेश (मृत्यु का भय)
नैतिक अनुशासन और सद्गुण
योग का अभ्यास केवल शारीरिक नहीं, नैतिक और मानसिक अनुशासन भी है। अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे यम और नियम का पालन आवश्यक है। योगसूत्रों के अनुसार, अहिंसा में स्थित साधक की उपस्थिति में हिंसक प्रवृत्तियाँ शांत हो जाती हैं।
प्रत्याहार और प्राणायाम
प्रत्याहार का अर्थ है इंद्रियों को भीतर की ओर मोड़ना। प्राणायाम यानी श्वास पर नियंत्रण, योग का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि ध्यान की गहराई में प्रवेश के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।
धारणा, ध्यान और समाधि: योग की आंतरिक यात्रा
योग का त्रिक – धारणा (एकाग्रता), ध्यान (एकाग्र चिंतन) और समाधि (पूर्ण एकत्व) – चेतना को बाह्य से आंतरिक बनाते हैं। इनका अभ्यास कठोर प्रयास और संयम से संभव है, किसी विशेष मानसिक शक्ति से नहीं।
योगिक शक्तियाँ और चेतावनी
कुछ योगी असाधारण क्षमताएँ (सिद्धियाँ) प्राप्त करते हैं जैसे मन पढ़ना, अदृश्य होना आदि, परंतु योगसूत्र इनसे बचने की सलाह देते हैं क्योंकि ये ध्यान भटकाने वाली हो सकती हैं। योग का लक्ष्य कैवल्य है, न कि चमत्कार।
धर्ममेघ समाधि और कैवल्य
धर्ममेघ समाधि अंतिम अवस्था से पहले की स्थिति है, जहाँ योगी को सभी वस्तुओं की सच्ची प्रकृति का अनुभव होता है। अंतिम लक्ष्य कैवल्य है – आत्मा की स्वतंत्र स्थिति, जो शरीर और मन के बंधनों से परे है।
निष्कर्ष
पतंजलि योग केवल शारीरिक आसनों या व्यायाम का नाम नहीं है, बल्कि यह एक पूर्ण मनो-आध्यात्मिक प्रणाली है जो आत्मा को मुक्त करने के लिए जीवन के प्रत्येक आयाम को संबोधित करती है। यह भारत की सबसे वैज्ञानिक, व्यवस्थित और गहन योग परंपराओं में से एक है।
“योगः चित्त-वृत्तिनिरोधः” – पतंजलि योगसूत्र
