शिव ही सत्य हैं: कश्मीर शैव धर्म का दार्शनिक और तांत्रिक दृष्टिकोण

Sanjay Bajpai
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कश्मीर शैव धर्म: शिव अद्वैत, स्पंदशास्त्र और प्रत्यभिज्ञा का रहस्य

🕉️ कश्मीर शैव धर्म: शिव अद्वैत की गूढ़ तंत्र परंपरा

कश्मीर शैव धर्म भारतीय दर्शन का एक रहस्यात्मक और गूढ़ संप्रदाय है, जो 8वीं से 12वीं शताब्दी के मध्य कश्मीर क्षेत्र में विकसित हुआ। यह परंपरा शिव को सर्वोच्च वास्तविकता मानते हुए एक अद्वैतवादी दर्शन प्रस्तुत करती है।

🔱 प्रमुख नाम और दर्शन

  • शिव अद्वैत: शिव ही एकमात्र वास्तविक सत्ता हैं, सबकुछ उन्हीं का विस्तार है।
  • त्र्यका प्रणाली: शिव, शक्ति और नाद का त्रित्व आधारित साधना मार्ग।
  • स्पंदशास्त्र: ब्रह्मांड की हर वस्तु में कंपन (स्पंद) है — यह शिव की चेतना की लहर है।
  • प्रत्यभिज्ञा दर्शन: आत्मा में ही शिव की छवि है, जिसे पहचानना ही मुक्ति है।

📚 प्रमुख आचार्य और ग्रंथ

इस परंपरा के सबसे प्रभावशाली आचार्य थे अभिनवगुप्त, जिन्होंने तंत्रलोक नामक विशाल ग्रंथ की रचना की। यह ग्रंथ तंत्र, योग, साधना और दर्शन का समेकन करता है। अन्य प्रमुख ग्रंथों में स्पंदकारिका, ईश्वरप्रत्यभिज्ञा और विज्ञान भैरव तंत्र शामिल हैं।

🌌 दर्शन की विशेषताएँ

  • शिव चेतना ही जगत का आधार है।
  • हर अनुभव में शिव के स्पंद का आभास होता है।
  • मुक्ति किसी निषेध से नहीं, बल्कि आत्मज्ञान से प्राप्त होती है।
  • यह परंपरा गहन आंतरिक साधना और तंत्र योग पर आधारित है।

🙏 समकालीन प्रतिनिधित्व

20वीं सदी में पंडित लक्ष्मण जू ने इस दर्शन को आधुनिक युग में पुनर्जीवित किया। उन्होंने इस परंपरा की व्याख्या वैश्विक स्तर पर की और गहन साधकों को शिव की ओर उन्मुख किया।

🔚 निष्कर्ष

कश्मीर शैव धर्म एक गहन आध्यात्मिक साधना मार्ग है, जो आत्मा और ब्रह्म के अद्वैत को प्रत्यक्ष करने की प्रक्रिया है। यह दर्शन हमें शिव को अपने भीतर पहचानने और उससे एकाकार होने का रास्ता दिखाता है।


लेखक: Santuti18 Blogger Team | स्रोत: अभिनवगुप्त ग्रंथ संग्रह, लक्ष्मण जू प्रवचन

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