🌌 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: आनंद, भक्ति और दिव्यता का पर्व
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और उल्लासपूर्ण पर्व है, जो भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की स्मृति में मनाया जाता है। यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है, जब आधी रात को भगवान ने वृषभानु के घर में रोहिणी नक्षत्र में जन्म लिया था — लगभग 5,000 वर्ष पूर्व।
🕉️ श्रीकृष्ण का दिव्य अवतरण
- भगवान कृष्ण का जन्म 3227 B.C. में हुआ था, जो विश्ववासु वर्ष और बारहस्पत्यमन के अनुसार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी से मेल खाता है।
- उनका जन्म एक रहस्य था — योगमाया के माध्यम से प्रकट हुए, न कि पंचमहाभूतों से बने शरीर में।
- उन्होंने अधर्म के विनाश, धर्म की पुनर्स्थापना और भक्ति के प्रचार हेतु अवतार लिया।
🎉 जन्माष्टमी के उत्सव की झलक
🔔 मंदिरों में दिव्यता की गूंज:
- कीर्तन, शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और संस्कृत भजनों से वातावरण पवित्र होता है।
- मथुरा और वृंदावन में विशेष आध्यात्मिक सभाएँ आयोजित होती हैं।
🌸 घरों में सजावट और भक्ति:
- दक्षिण भारत में महिलाएँ घरों को सजाती हैं, मक्खन और मिठाइयाँ चढ़ाती हैं।
- आटे से बने छोटे पैरों के निशान प्रभु के आगमन का प्रतीक होते हैं।
🕛 आधी रात की पूजा:
- उपवास रखकर भक्त आधी रात को भगवान का अभिषेक करते हैं।
- 108 बार नाम जाप, आरती, पालने में झुलाना — सब जन्म के समय के साथ समक्रमित।
📖 श्रीमद्भागवतम और कृष्ण की लीलाएँ
- श्रीकृष्ण की लीलाएँ — गोवर्धन उठाना, पूतना वध, रास लीला — चमत्कारों से भरी हैं।
- भागवत पुराण के चार मुख्य श्लोकों का पाठ अवश्य करें:
सृष्टि से पहले मैं ही था। कुछ भी नहीं था, न अस्तित्व, न अनस्तित्व। आत्मा में जो पाया जाता है, वही सत्य है। मैं ब्रह्मांड में व्याप्त हूँ और उससे परे भी हूँ। जो हर जगह है, उसे जानो और भ्रम से मुक्त हो जाओ।
🎶 श्रीकृष्ण: सौंदर्य, संगीत और साक्षात आनंद
- उनकी बांसुरी का मधुर संगीत तीनों लोकों को मोहित करता है।
- उनके चरणों पर दिव्य चिन्ह — कमल, चक्र, स्वस्तिक, गाय के पदचिह्न — उनकी दिव्यता के प्रतीक हैं।
- वे रथचालक, statesman, संगीतज्ञ और योगी — सभी रूपों में अद्वितीय थे।
🙏 भक्ति ही मार्ग है
- कृष्ण के प्रति प्रेम ही सच्चा विज्ञान है।
- राधा-कृष्ण के कमल चरणों का ध्यान ही आत्मा की मुक्ति का द्वार है।
- "ओम नमो भगवते वासुदेवाय" का जप जीवन को दिव्यता से भर देता है।
🔥 शिवानंद आश्रम, ऋषिकेश में जन्माष्टमी
- आठ दिन तक जप और भागवत पाठ
- भव्य हवन, सत्संग, प्रवचन, और आधी रात की पूजा
- गोपिका गीतम और कृष्ण जन्म की कथा का पाठ
🌺 निष्कर्ष: कृष्ण का अवतार — मानवता के लिए दिव्य उपहार
जब अधर्म बढ़ता है, तब भगवान अवतार लेते हैं — संतुलन बहाल करने, प्रेम फैलाने और आत्मा को जागृत करने के लिए। श्रीकृष्ण का जीवन, उनकी शिक्षाएँ और उनका प्रेम आज भी करोड़ों भक्तों के हृदय में गूंजता है।
आप सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!
राधे-कृष्ण के प्रेम से आपका जीवन आनंदमय हो।


