🌟 चिदंबरम का नटराज मंदिर – अंतरिक्ष की नृत्यशाला 🌟

Sanjay Bajpai
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📌 परिचय
तमिलनाडु के चिदंबरम में स्थित नटराज मंदिर न केवल आध्यात्मिक महत्त्व रखता है, बल्कि यह भारत की प्राचीन वास्तुकला और सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत उदाहरण भी है। इसे “आकाश स्थलम” कहा जाता है – पंचभूत के पांच तत्वों में से ‘अंतरिक्ष’ की अभिव्यक्ति।


🕉️ नटराज – ब्रह्मांडीय नर्तक का रूप

  • मंदिर में भगवान शिव की नटराज मूर्ति को ब्रह्मांडीय नृत्य करते हुए दर्शाया गया है – यह नृत्य सृष्टि, स्थिति और संहार का प्रतीक है।

  • मूर्ति की प्रत्येक मुद्रा, प्रत्येक अंग और चक्र रहस्यपूर्ण तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है।


🏯 ऐतिहासिक एवं स्थापत्य विशेषताएँ

घटक

काल / शासक

विशेषताएँ

पूर्वी गोपुरम

कुलोत्तुंग द्वितीय (1133–1150)

ऊँचा और विस्तृत प्रवेशद्वार

दक्षिणी गोपुरम

कोप्परुंजिंगदेव प्रथम (~1237)

स्थापत्य में नायक शैली के प्रभाव

उत्तरी गोपुरम

विजयनगर सम्राट कृष

पांड्य शैली में नक्काशी

बाहरी प्राकार

विराप्पा नायक (17वीं शताब्दी)

संरचनात्मक मजबूती और विस्तारित गलियारे


🌊 पंचतत्व स्थलमों में स्थान
चिदंबरम मंदिर पंचभूत स्थलमों में “आकाश” तत्व को दर्शाता है।
अन्य स्थलमों जैसे कांची का “पृथ्वी” (कैलासनाथ मंदिर) इसके पूरक हैं। यह हिन्दू दर्शन में प्रकृति और तत्वों के संतुलन की गहरी अवधारणा को सामने लाता है।


🎨 वास्तुकला का संगम

  • चोल, पांड्य, नायक और विजयनगर राजवंशों की शैली का सम्मिलन

  • शिखरों पर अंकित मछली प्रतीक (पांड्य चिह्न)

  • गोपुरमों की ऊँचाई और विवरण में क्षेत्रीय विविधता झलकती है


🌌 संक्षेप में
चिदंबरम का नटराज मंदिर एक दिव्य काव्य है – पत्थर में तराशा गया ब्रह्मांडीय संगीत। यहां तत्वों का संतुलन, नृत्य की गति और स्थापत्य की शक्ति एक साथ विलीन होते हैं।


नटराज मूर्ति – शिव का ब्रह्मांडीय नृत्य रूप
नटराज की मूर्ति भगवान शिव को उनके तांडव नृत्य में दर्शाती है, जो सृष्टि की रचना, स्थिति और संहार का प्रतीक है। यह मूर्ति न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक और कलात्मक दृष्टि से भी अत्यंत प्रभावशाली है।

🛕 मूर्ति की विशेषताएँ:

  • मुद्रा: शिव की नृत्य मुद्रा में एक पैर अपार अज्ञानता पर रखा होता है, जबकि दूसरा हवा में उठा होता है – यह चेतना की ऊँचाई का प्रतीक है।
  • अग्नि और डमरू: एक हाथ में अग्नि (संहार) और दूसरे में डमरू (सृजन) होता है।
  • अर्धचंद्र और जटाएँ: सिर पर अर्धचंद्र और उड़ती हुई जटाएँ ब्रह्मांडीय ऊर्जा को दर्शाती हैं।
  • घेरा: मूर्ति के चारों ओर अग्नि का घेरा होता है, जो ब्रह्मांड की सीमाओं को दर्शाता है।

🛍️ खरीदने के लिए विकल्प:

अगर आप नटराज मूर्ति खरीदना चाहते हैं, तो Amazon.in पर कई विकल्प उपलब्ध हैं – जैसे:

  • धातु की मूर्तियाँ: पीतल, कांस्य या गोल्ड प्लेटेड
  • आकार: 5 इंच से लेकर 24 इंच तक
  • शैली: पारंपरिक चोल शैली से लेकर आधुनिक सजावटी रूपों तक

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