🌺 कार्तिगई दीपम: प्रकाश का पर्व और अरुणाचल की ज्योति
कार्तिगई दीपम (Kartigai Deepam) तमिलनाडु और दक्षिण भारत का एक अत्यंत पावन पर्व है। यह उत्सव तमिल मास कार्तिगई की पूर्णिमा (नवंबर–दिसंबर) को मनाया जाता है, जब कृत्तिका नक्षत्र उदित होता है। इसी दिन पवित्र अरुणाचल पर्वत (तिरुवन्नामलाई, तमिलनाडु) की चोटी पर विशाल दीप प्रज्वलित किया जाता है, जिसे लाखों श्रद्धालु दर्शन करते हैं।
✨ पौराणिक कथा
एक समय ब्रह्मा और विष्णु अपनी-अपनी श्रेष्ठता को लेकर विवाद कर रहे थे। तब भगवान शिव ने अनंत ज्योति (ज्योतिर्लिंग) का रूप धारण कर उन्हें यह दिखाया कि वे ही ब्रह्मांड के आदिदेव हैं।
भगवान ने स्वयं को अरुणाचल पर्वत के रूप में प्रकट किया। इसी स्थान पर माता पार्वती ने तपस्या की और भगवान शिव ने उन्हें पुनः अपने अर्धांग (अर्धनारीश्वर) रूप में स्वीकार किया।
यहां के भगवान को अरुणाचलेश्वर (तेजो लिंग) कहा जाता है। पंचभूत (पाँच तत्वों) में से अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व अरुणाचल करता है।
🔥 दीपम का आयोजन
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कार्तिगई दीपम के दिन अरुणाचल पर्वत की चोटी पर विशाल अग्नि प्रज्वलित की जाती है।
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भक्त दूर-दूर से आकर उस ज्योति के दर्शन करते हैं और एक स्वर में पुकारते हैं – "हरोहरा!"
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यह ज्योति इस सत्य का प्रतीक है कि आत्मा स्वयंप्रकाश है, भगवान शिव ही प्रकाश का प्रकाश हैं।
🌌 आध्यात्मिक अर्थ
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दीपम केवल बाहरी प्रकाश नहीं है, बल्कि यह हमें अपने भीतर के आत्मप्रकाश को देखने का संदेश देता है।
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असली कार्तिगई दीपम वह है, जब हम अपने अहंकार, स्वार्थ और मोह की अशुद्धियों को जलाकर शिवज्ञान (आत्मज्ञान) की ज्योति में लीन हो जाते हैं।
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यही प्रकाश हमें अमरत्व और परम शांति की ओर ले जाता है।
🙏 उत्सव का रूप
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दक्षिण भारत के मंदिरों में इस दिन अग्निकुंड (अग्नि का अलाव) जलाया जाता है, जो इस बात की स्मृति है कि भगवान शिव ने असुरों के रथों को अग्नि में भस्म कर दिया था।
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घर-घर में दीपक सजाए जाते हैं और आतिशबाज़ी की जाती है।
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विशेष प्रसाद जैसे अप्पम और पोरी (लड्डू और मुरमुरे का भोग) अर्पित किए जाते हैं।
🌺 संदेश
कार्तिगई दीपम हमें यह सिखाता है कि –
“जैसे बाहरी दीप अंधकार को मिटाता है, वैसे ही आत्मा का प्रकाश अज्ञान को मिटाकर हमें अमरत्व और दिव्यता की ओर ले जाता है।”
✨ "दीपों का यह पर्व आप सभी के जीवन में प्रकाश, समृद्धि और शिव-ज्ञान की ज्योति जगाए।"
