🌸 ओणम: केरल का राष्ट्रीय पर्व और महाबली की कथा
🌼 ओणम के प्रमुख आकर्षण
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अथपूक्कलम (फूलों की रंगोली) – हर घर के आँगन में सुंदर फूलों से बनी पंखुड़ियों की रंगोली सजाई जाती है।
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ओणसद्या (Onam Sadhya) – केले के पत्ते पर परोसे जाने वाले पारंपरिक भोज में 20 से अधिक व्यंजन शामिल होते हैं।
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नौका दौड़ (Vallamkali) – पंबा नदी में होने वाली नाव दौड़, ओणम का सबसे रोमांचक दृश्य है।
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अथाचमयम जुलूस – तिरिप्पुनितुरा से निकलने वाली सांस्कृतिक शोभायात्रा, केरल की कला और संस्कृति की झलक देती है।
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पुलिकली व कुम्मटिकली – बाघ और मुखौटा नृत्य, लोककला की जीवंत परंपरा को दर्शाते हैं।
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थुंबी थुल्लाल – महिलाओं द्वारा गाए और नाचे जाने वाले पारंपरिक गीत।
इन सब आयोजनों के बीच, पूरा केरल रंगों, रोशनी और आनंद से झूम उठता है।
👑 महाबली की कथा और वामनावतार
ओणम का सबसे प्रमुख और लोकप्रिय मिथक राजा महाबली से जुड़ा है।
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महाबली, दैत्यराज विरोचन के पुत्र और प्रह्लाद के पौत्र थे।
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वे धर्मनिष्ठ, दानशील और न्यायप्रिय शासक थे।
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उनके शासनकाल में न गरीबी थी, न अन्याय और न ही अपराध।
उनकी बढ़ती ख्याति से इंद्र सहित देवता चिंतित हो उठे और उन्होंने भगवान विष्णु से प्रार्थना की।
वामनावतार की कथा
भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और यज्ञ कर रहे महाबली के पास ब्राह्मण बालक के रूप में पहुँचे। जब महाबली ने उनकी इच्छा पूछी तो वामन ने केवल तीन पग भूमि माँगी।
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पहले पग में उन्होंने धरती नाप ली।
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दूसरे पग में आकाश।
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तीसरे पग के लिए स्थान न होने पर महाबली ने अपना शीश झुका दिया।
वामन ने उनके सिर पर पैर रखकर उन्हें पाताल लोक भेज दिया। लेकिन उनकी भक्ति और दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें हर वर्ष अपने प्रजा से मिलने की अनुमति दे दी।
यही दिन तिरुओणम के रूप में मनाया जाता है।
📜 साहित्य और अन्य मान्यताएँ
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ओणम का उल्लेख केरल महात्म्यम (ब्रह्मांड पुराण से संबद्ध ग्रंथ) में मिलता है।
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इसका वर्णन पथुपट्टु और संगमकालीन कवि मंगुडी मरुथनार की रचना मदुरै कांची में भी है।
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एक अन्य किंवदंती के अनुसार, भगवान परशुराम ने केरल भूमि का सृजन किया और ओणम उत्सव इसी से जुड़ा बताया जाता है।
🎶 “मावेलि नाडु वनीडुम कालम...”
ओणम से जुड़ा एक लोकप्रिय मलयालम लोकगीत महाबली के स्वर्णिम शासन की याद दिलाता है। गीत के बोल कहते हैं कि “जब मावेली राज्य कर रहे थे, तब सब लोग समान थे, किसी को दुख नहीं था।”
🌺 निष्कर्ष
ओणम केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, आनंद और एकता का प्रतीक है। यह अवसर है जब हर केरलवासी, चाहे वह कहीं भी रहता हो, अपनी परंपराओं, संस्कृति और अपने राजा महाबली को याद करता है।
