🙏 गणेश चतुर्थी: गणेश जी की टूटी हुई दाँत की तीन कहानियाँ और उनका महत्व

Sanjay Bajpai
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🙏 गणेश चतुर्थी: गणेश जी की टूटी हुई दाँत की तीन कहानियाँ और उनका महत्व

गणेश चतुर्थी हिन्दू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता श्री गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। गणेश जी की अद्वितीय छवि, जिसमें उनका एक दाँत टूटा हुआ है, कई गहरी कथाओं और प्रतीकों से जुड़ी हुई है।

1. महाभारत लेखन और टूटी दाँत

ऋषि वेदव्यास ने जब महाभारत का लेखन प्रारंभ किया, तो उन्होंने गणेश जी को अपना लेखक चुना। गणेश जी ने शर्त रखी कि वे बिना रुके लिखेंगे। जब लेखनी टूट गई, तो उन्होंने अपना दाँत तोड़कर कलम बना लिया और महाकाव्य को अमर कर दिया।

महत्व: यह कथा महाभारत को दिव्य अधिकार देती है और गणेश जी को ज्ञान, लेखन और शास्त्र संरक्षण का प्रतीक बनाती है।

2. परशुराम और गणेश जी

एक प्रसंग के अनुसार, परशुराम जी जब शिवजी से मिलने कैलाश पहुँचे तो गणेश जी ने उन्हें रोक दिया। क्रोधित होकर परशुराम ने अपने परशु (कुँठार) से आघात किया। गणेश जी ने प्रतिकार नहीं किया और वार को अपने दाँत पर सह लिया ताकि शिवजी के अस्त्र-शस्त्र की महिमा अक्षुण्ण बनी रहे।

महत्व: यह कथा गणेश जी की शक्ति और विनम्रता को दर्शाती है। वे अपने पिता शिव के प्रति आज्ञाकारी और समर्पित पुत्र के रूप में प्रस्तुत होते हैं।

3. चंद्रमा और गणेश जी

एक हास्यपूर्ण और लोककथा के अनुसार, गणेश जी ने एक बार मोडकों का अधिक भक्षण कर लिया। उनका पेट भारी हो गया और मूषक (वाहन) डगमगा गया। चंद्रमा ने उपहास किया, तो गणेश जी ने क्रोधित होकर अपना दाँत तोड़कर चंद्रमा पर फेंक दिया। इससे चंद्रमा की चमक कम हो गई और चंद्रकलाओं का क्रम प्रारंभ हुआ।

महत्व: यह कथा एक एटियोलॉजिकल (etiological) व्याख्या देती है कि चंद्रमा घटता-बढ़ता क्यों है। साथ ही यह कथा गणेश जी के मानवीय, सरल और विनोदी स्वरूप को दर्शाती है।

🌺 गणेश चतुर्थी का महत्व

  • धार्मिक: गणेश जी को प्रथम पूज्य मानकर हर कार्य से पहले उनका आवाहन किया जाता है।
  • सांस्कृतिक: यह पर्व भारत के अनेक राज्यों में उत्साहपूर्वक मनाया जाता है, विशेषकर महाराष्ट्र में।
  • सामाजिक: सामूहिक उत्सव, पंडाल, भजन, नृत्य और कला का प्रदर्शन सामाजिक एकता और भाईचारे को बढ़ाता है।

इस प्रकार गणेश चतुर्थी केवल जन्मोत्सव ही नहीं, बल्कि ज्ञान, भक्ति, शक्ति और विनम्रता का उत्सव है। गणेश जी की टूटी दाँत की ये तीन कथाएँ हमें सिखाती हैं कि ज्ञान का मूल्य त्याग में है, शक्ति विनम्रता में है और हास्य जीवन की कठिनाइयों को सरल बनाता है।


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