🌞 इक्ष्वाकु वंश: मनु से श्रीराम तक और महाभारत काल तक की संपूर्ण राजावली
(हिन्दू इतिहास, पुराणों और रामायण आधारित वंशावली)
इक्ष्वाकु वंश (सूर्यवंश) भारतीय इतिहास और पुराणों के सबसे प्राचीन वंशों में से एक है।
इस वंश की शुरुआत वैवस्वत मनु से होती है और इसकी प्रसिद्धि चरम पर पहुँचती है भगवान श्रीराम और आगे उनके पुत्र कुश की वंशरेखा से, जो महाभारत युद्ध के समय के राजा बृहद्बल तक चलती है।
यहाँ प्रस्तुत सूची रामायण, विष्णु पुराण, हरिवंश, अग्नि पुराण, मत्स्य पुराण आदि में वर्णित वंशानुसार तैयार की गई है—
और इक्ष्वाकु से लेकर महाभारत तक 115 राजाओं का विस्तृत एवं क्रमबद्ध लेखन है।
🔱 भाग 1 — इक्ष्वाकु से श्रीराम तक (1–81)
1. वैवस्वत मनु (विवस्वान मनु)
पत्नी – श्रद्धा
2. इक्ष्वाकु
(पूर्व नाम ऋषभ; गन्ने के रस से जीवित रहने के कारण नाम इक्ष्वाकु पड़ा)
3. भरत (कुक्षि)
इक्ष्वाकु के 100 पुत्रों में सबसे बड़े, बलिष्ठ होने के कारण कुक्षि/कुशकी नाम।
4. विकुक्षि (शशाद)
खरगोश का मांस खाने के कारण “शशाद” कहे गये।
5–23.
बाण, ककुत्स्थ (पुरंजय), अनेन, पृथु, विश्वरन्ध्री, चन्द्र्र, युवनाश्व-1, शाश्वत, बृहदश्व, कुबलयाश्व, दृढ़ाश्व–कपिलाश्व–भद्राश्व, प्रमोद, हर्यश्व, निकुम्भ, बहरणाश्व, गिरिताश्व, कृशाश्व, प्रसैनजीत-1, युवनाश्व-2।
24. मंदाता (चक्रवर्ती सम्राट)
रावण को हराया, लवणासुर द्वारा मथुरा में वध।
25–37.
पुरुकुत्स, अम्बरीष, मुचुकुन्द, वसुद, त्रयदस्यु, सम्बृत, अनरण्य-1 (रावण को श्राप), पुषदश्व, हर्यश्व-2, सुमन, त्रिधन्वन्, त्रयरुणि, त्रिबन्धन।
38. सत्यव्रत (त्रिशंकु)
विश्वामित्र ने इनके लिए "त्रिशंकु स्वर्ग" रचा।
39. हरिश्चंद्र
सत्य के प्रतीक, समकालीन – सहस्त्रार्जुन।
40–50.
रोहिताश्व, हरित, चम्प, सुदेव, विजय, भरुक, प्रतापेन्द्र, बृक, सुशन्धि, बाहुक, भरत (रामायण वाला नहीं), असीत (कालिंद), सगर।
51–60.
असमान्जस, अंशुमान, दिलीप, भगीरथ (गंगा अवतरण), श्रुत, कुकुत्स-2, रघु-1, नाभ/नाभाग, अम्बरीष-2, सिंधुद्वीप।
61–71.
अव्युताय, रितुपर्ण, सर्वकाम, सुदास, सौदास/कल्माषपाद, अस्मक, मूलक, दशरथ-1, अद्विल, विश्वामश, अनरण्य-2, निध्न, अनिमित्र।
72–80.
दुलुलाह, कृषकर्मा, दिलीप-2 (कटक), दीर्घबाहु, रघु-2, अजा, दशरथ।
81. ✳️श्रीराम
(अयोध्या के महान सम्राट; भाई – लक्ष्मण, भरत, शत्रुध्न)
🔱 भाग 2 — श्रीराम से महाभारत तक (82–115)
(कुश से लेकर बृहद्बल तक)
82–115 (राम → कुश → बृहद्बल)
- कुश
- अतिथि
- निषध
- नल
- नभास
- पुण्डरीक
- क्षेमधन्वन्
- देवनिक
- अहिनागु
- रूप
- रूरु
- परिपात्र
- दल (बलस्थल)
- छल/अनल
- उक्य
- वज्रनाभ
- खगन
- विघृति
- विश्वसह-2
- हिरण्यनाभ (ऋषि जैमिनि के शिष्य; याज्ञवल्क्य ने गुरु माना)
- पुष्य
- ध्रुवसन्धि
- सुदर्शन-2
- अग्निवर्ण-2
- शिघ्र
- मरु-2
- प्रसुश्रुत
- सुसन्धि
- अमर्षण एवं सहस्वन्त
- महास्वन्
- विश्वसह
- प्रसैनजीत-2
- तक्षक
- बृहद्बल —
महाभारत युद्ध में भीम-पुत्र अभिमन्यु द्वारा वध (आयु: 125 वर्ष)
🕉️ निष्कर्ष
इक्ष्वाकु वंश भारतीय इतिहास में सबसे दीर्घकालीन और प्रतिष्ठित राजवंश है।
इसमें—
✔ मनु → इक्ष्वाकु → श्रीराम → कुश → बृहद्बल
✔ रामायण व महाभारत—दोनों काल एक ही वंशरेखा में जुड़ते हैं
✔ लगभग 115 पीढ़ियों तक निरंतर निरंतर शासन