🔸 श्लोक
तादृषि जायते बुद्धिवर्यवसयोपि तादृषिः।
सहयासस्तादृषाः एव यादृषि भविताव्यता।
🪔 अर्थ
व्यक्ति को सब कुछ उसके भाग्य के अनुसार मिलता है। उसकी बुद्धि, प्रयास, और साथी तक उसी अनुरूप होते हैं, जैसा कि उसके भाग्य में पहले से निर्धारित होता है।
📜 व्याख्या
- मानव जीवन में जो भी घटित होता है — चाहे वह विचार हों, प्रयास हों, या उसके आसपास के लोग हों — यह सब भाग्य द्वारा निर्धारित होता है।
- भाग्य ही परिस्थिति, सहयोगी, और कर्म के अवसरों का निर्माण करता है।
🌾 उदाहरण
यदि किसी के भाग्य में अच्छी फसल लिखी है, तो:
- उसे उपयुक्त जलवायु,
- अच्छा बीज,
- उपयुक्त समय,
- और मजदूरों का सहयोग भी प्राप्त होगा।
❗ निष्कर्ष
इस श्लोक के अनुसार, भाग्य ही प्रधान शक्ति है जो मानव की बुद्धि, योजना और प्रयास की दिशा को नियंत्रित करता है।
🙏 यह दृष्टिकोण भारतीय दार्शनिक चिंतन में नियतिवाद (Determinism) की एक प्रमुख धारा को दर्शाता है।