🔱 Aghori Sadhu: रहस्यमयी साधु जो मृत्यु को साधते हैं
Aghori (अघोरी), जिसका अर्थ है “भयानक नहीं,” भारतीय साधुओं में सबसे अधिक रहस्यमयी और विवादित माने जाते हैं। इनका पथ अघोर साधना कहलाता है, जिसमें वे मृत्यु, भय, और तंत्र से जुड़े गहन साधनों द्वारा मोक्ष प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
🔥 श्मशान में रहने वाले साधु
अघोरी श्मशानों में रहते हैं और वहीं ध्यान, साधना और तांत्रिक क्रियाएं करते हैं। वे अपने शरीर पर मृत देह की राख मलते हैं और मानव खोपड़ी
🍖 सामाजिक वर्जनाओं को तोड़ने वाले
- मानव मांस का सेवन
- मल और मूत्र का सेवन (कभी-कभी)
- अभिचार तंत्र और गुप्त क्रियाएं
- खोपड़ी का पात्र, कपाल क्रिया
इनकी साधना समाज के लिए विचलित करने वाली हो सकती है, लेकिन इसका उद्देश्य है - अद्वैत की अनुभूति।
🕉️ तांत्रिक दर्शन और उद्देश्य
अघोरी वाममार्ग तंत्र साधना का पालन करते हैं, जिसमें 'अशुद्ध' समझे जाने वाले तत्वों में ही ईश्वर की उपस्थिति को अनुभव किया जाता है। यह मार्ग कठिन, उग्र, और केवल उन्नत साधकों के लिए है।
वे शिव और महाकाली के भक्त होते हैं और मानते हैं कि भय का सामना कर ही मुक्ति मिलती है।
🧙♂️ उत्पत्ति और परंपरा
अघोरी परंपरा की जड़ें गोरखनाथ और प्राचीन कापालिक संप्रदाय से जुड़ी मानी जाती हैं। इनका इतिहास अत्यंत गूढ़ और रहस्यपूर्ण है।
🛑 सामाजिक दृष्टिकोण
समाज में अघोरियों को प्रायः भय और दूरी की दृष्टि से देखा जाता है। लेकिन कई अध्यात्मिक साधक उन्हें अत्यंत उन्नत योगी मानते हैं, जो मृत्यु और जीवन दोनों के पार पहुँच चुके हैं।
📚 संबंधित विषय
नोट: अघोरी परंपरा एक अत्यंत गूढ़ और खतरनाक साधना पथ है। इसे केवल वही साधक अपनाते हैं जो पूर्ण त्याग, साहस और गुरु कृपा से संपन्न होते हैं।
