🕉️ श्री शिव तांडव स्तोत्रम्
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जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥1॥
जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी
विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम॥2॥
... *(कुल 16 श्लोक — यदि चाहें तो पूरा संपूर्ण संस्करण भेज सकता हूँ)*
📖 अर्थ (सारांश):
यह स्तोत्र रावण द्वारा रचित है, जिसमें भगवान शिव की तांडव मुद्रा, गंगा, जटाओं, नाग, चंद्र, डमरू, अग्नि, त्रिनेत्र और दिव्यता का अत्यंत मनोहर वर्णन है। इसका पाठ करने से शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
🕉️ शिव तांडव का नित्य पाठ – वाणी में ओज, जीवन में तेज लाता है।
