🕉️ शिव चालीसा
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**दोहा**
नमामि शमीशान निर्वाण रूपं,
विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं,
चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम्॥
**चालीसा**
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥1॥
जय शिव ओंकारा, प्रभु अनूप अविनाशी।
सदा शिव एक रूप, त्रिभुवन के त्रिकाशी॥2॥
नन्दी को वाहन जो, त्रिशूलधारी हो।
गंगा विराजत शीश, जटा मुकुट उजियारी हो॥3॥
सर्पों की माला गले, भूतों के तुम स्वामी।
त्रिनेत्र धारी शम्भु, करो कृपा अभिरामी॥4॥
कैलास के वासी हो, सदाशिव अविनाशी।
नागेन्द्र हरण, चन्द्रधर, त्रिपुरारी महामुनी आशि॥5॥
कामदेव को जलाया, गजासुर को मारा।
भस्म लेप कर शरीर, तांडव करत प्यारा॥6॥
भूत प्रेत पिशाच निकट, न आवे कोई।
महावीर जब नाम सुनावे, बैरिन भागे रोई॥7॥
शिव शम्भू बाबा तुम, दीनन की सेवा।
करो कृपा हे शम्भु, हरो पाप की मेवा॥8॥
अष्ट सिध्दि नव निधि के, दाता तुम ही हो।
ज्ञान और वैराग्य, शिव तुम्हीं से मिले जो॥9॥
**दोहा**
शिव चालीसा जो पढ़े, शिवजी का ध्यान करे।
शंकर कृपा से सुख मिले, भव सागर से तरें॥
🙏 लाभ:
- नकारात्मकता और भय दूर होता है।
- कष्ट, रोग और संकट मिटते हैं।
- शांति, शक्ति और सफलता प्राप्त होती है।
🔁 प्रतिदिन पाठ करें और जीवन में शिव कृपा प्राप्त करें।
